तहसील में बेखौफ घूमते फर्जी वकील, कानून व्यवस्था को बना रहे मज़ाक
एसडीएम कार्यालय में फायरिंग से मचा हड़कंप, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पट्टी तहसील में नकली अधिवक्ताओं का नंगा नाच, उपजिलाधिकारी कार्यालय में तड़तड़ाई गोलियां
तहसील में बेखौफ घूमते फर्जी वकील, कानून व्यवस्था को बना रहे मज़ाक
एसडीएम कार्यालय में फायरिंग से मचा हड़कंप, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रतापगढ़ की बहुचर्चित पट्टी तहसील परिसर में फर्जी अधिवक्ताओं का बोलबाला दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। बिना किसी कानूनी डिग्री और अधिवक्ता परिषद के पंजीकरण के, ये लोग खुलेआम खुद को वकील बताकर न सिर्फ आम जनता को गुमराह कर रहे हैं बल्कि कानून-व्यवस्था को भी चुनौती दे रहे हैं। हाल ही में तहसील में हुई एक गंभीर घटना ने इस समस्या को और उजागर कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, खुद को अधिवक्ता बताने वाले एक व्यक्ति विकास श्रीवास्तव ने एसडीएम कार्यालय चल रही एक मामले की जिरह में बातों ही बातों में विपक्षी अधिवक्ता बबलू तिवारी, रवि सिंह, प्रदीप पाठक इत्यादि पर अचानक फायरिंग झोंक दी, जिससे वहां मौजूद अधिकारियों, वकीलों और आम नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई । घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची परन्तु हमलावर फरार हो गया ।
बढ़ रही है फर्जी वकीलों की संख्या, काली कोट में घूम रहे अपराधी
तहसील और न्यायालय परिसर में बिना किसी वैध दस्तावेज़ के खुद को अधिवक्ता बताने वाले लोग सक्रिय हैं। ये लोग न केवल आम लोगों को धोखा देते हैं, बल्कि कई बार दबंगई और गुंडागर्दी पर भी उतर आते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इनकी पहचान मुश्किल होती है, क्योंकि ये नकली आईडी कार्ड और काले कोट पहनकर असली वकीलों जैसा दिखने की कोशिश करते हैं। ज्ञात हो कि तहसील परिसर में ऐसे ही एक व्यक्ति द्वारा गोली चलाने की घटना संज्ञान में आई है ।
कानूनी कार्रवाई और प्रशासन की लापरवाही
इस घटना के बाद अधिवक्ता संघ और प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। असली वकीलों का कहना है कि प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और तहसील परिसर में केवल पंजीकृत वकीलों को ही प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए तथा शस्त्र इत्यादि ले कर प्रवेश करने पर पूर्णतया रोक होनी चाहिए ।
देखना दिलचस्प होगा कि क्या जिला प्रशासन अब जागेगा, या फर्जी अधिवक्ताओं का आतंक यूं ही जारी रहेगा ।